Wednesday, November 2, 2016

ज़िन्दगी की सीख Hindi Motivational Story

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                     ज़िन्दगी की सीख  Hindi Motivational Story

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एक बार की बात है ,घास के मैदान में एक टिड्डा अपने परिवार के साथ रहता था। गर्मियों के मौसम में दिन गर्म होता था और घास हरी रहती थी, इसलिए टिड्डा अपने परिवार के साथ ख़ुशी ख़ुशी रहता था। टिड्डा घास के मैदान में अपने मित्रो वा परिवार के साथ खेलता कूदता था। टिड्डा अपनी इस ज़िन्दगी से बहुत ज्यादा खुश था। गर्मियों के मौसम में टिड्डे के परिवार के पास भोजन की कमी नहीं होती थी ,इसलिए टिड्डा बड़े आराम के साथ अपना जीवन यापन करता था।

पास में ही एक चींटी अपने परिवार के साथ रहती थी। एक तरफ जहाँ टिड्डा और उसका परिवार बड़े आराम से रहता था। उसके विपरीत चींटी और उसके परिवार को अपने भोजन के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता था। चींटी का पूरा परिवार भोजन की खोज में एक जगह से दूसरी जगह जाते और बहुत मेहनत करते तब जाकर जो भी खाने का सामान मिलता उसे बिल में जमा कर देते। वह टिड्डा यह सब देखता था और उनका मजाक उड़ाया करता था। एक दिन टिड्डा ने चींटी का मजाक उड़ाते हुए कहा, तुम  गर्मी के इस शानदार मौसम का आनंद क्यों नहीं लेते ? क्या तुमने जीवन का आनंद लेने बारे में कभी क्यों नहीं सोचा ?

उस चींटी ने हँसते हुए जवाब दिया, अगर हमने अभी मेहनत नहीं की , तो आने वाली सर्दी में हम जीवित नहीं रह पायेंगे। अभी इस मौसम में तो भोजन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। ऐसे में बुद्धिमानी इसी में  है की भविष्य के लिया भोजन का संग्रह कर लिया जाये। चींटी टिड्डा से पूछती है की, क्या तुम आगामी सर्दी को लेकर चिंतित नहीं हो ?
टिड्डे ने कहा, अभी तो सर्दी आने में समय है। तुम्हारी मुश्किल ये है की  ज़रूरत से ज्यादा सोचती हो। में तुम्हारी तरह हमेशा चिंतित नहीं रह सकता।

चींटी और उसका परिवार पूरी गर्मी अनाज के दाने का संग्रह करने में लगा रहा। वही दूसरी तरफ टिड्डा और उसका परिवार आराम से हँसते खेलते हुए रहता था। टिड्डा यही सोचता था की चींटी और उसका परिवार कितना मुर्ख है। जो इस मौसम का मजा भी नहीं ले रहा और भविष्य की व्यर्थ चिन्ता में लगा रहता है।

दिन बीतते गए और देखते ही देखते सर्दी आ गयी और पूरा मैदान बर्फ से ढक गया। ऐसे में इस सर्द हवायों में भोजन दुर्लभ हो गया और जीव जन्तुयों से लेकर कीड़े मकोड़े तक गर्म जगहों की तलाश करने लगे। टिड्डा और उसका परिवार भी भोजन की तलाश में दर दर भटकने लगा। एक दिन टिड्डा ने चींटी को उसके परिवार के साथ आनंद लेते हुए देखा। चींटी और उसके परिवार के पास भोजन की कमी नहीं थी। एक दिन टिड्डा चींटी के पास गया। टिड्डा ने चींटी से अनुरोध किया की मेरे परिवार को भी थोड़ा सा भोजन दे  दो। चींटी ने जवाब दिया की तुम बहुत आलसी हो। जब मेहनत करने की ज़रूरत थी तब तुम नाच गा रहे थे। हमने मेहनत की इस लिया हमारे पास पर्याप्त भोजन है। पर हमारे पास अधिक भोजन नहीं है। मुझे माफ करना।

टिड्डा और उसके परिवार को बहुत पछतावा हुआ। वह अपने किया पे पछताने लगे की अगर हमने भी सही वक्त पे मेहनत की होती तो आज हमारे पास भी भोजन होता।

दोस्तों इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है की हमे कभी किसी की स्थिति का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। और बैठे रहने के बजाय भविष्य के लिए सोचना ही बुद्धिमानी है।  आप को ये कहानी कैसी लगी आप अपना feedback मुझे comment करके बता सकते हैं। आप मेरा link भी save  कर सकते हैं (www.achhesandesh.in )
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6 comments:

  1. badhiya kahani Hai or apne mast likhi hai , good luck keep blogging with us check our site techindiaz.com

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  2. काफी अच्छी कहानी है | Thanks.

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  3. बहुत ही अच्छा लेख .... Shandar, Umda ... Thanks for sharing this!! :) :)

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  4. हम अपने आसपास कई बार बहुत ही साधारण व्यक्तित्व, आर्थिक रूप से कमजोर, पारिवारिक परेशानी से जूझने वाले और अल्प शिक्षा प्राप्त लोगों को देखते हैं जो कि विपरीत परिस्थितयों के बावजूद अपनी मेहनत, दृढ इच्छाशक्ति से सफलता का मुकाम हासिल करके सबको अचंभित करते है। ऐसे लोग हम सब के लिए प्रेरणा के स्त्रोत होते हैं।

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