Tuesday, October 18, 2016

बेटी की चाहत Hindi Motivational Story

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                        बेटी की चाहत Hindi Motivational Story

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ये कहानी एक १२ साल की लड़की की  है। जिसका नाम कीर्ति है। कीर्ति अपने माँ बाप  इकलौती संतान है। कीर्ति के पिता एक बहुत बड़े व्यापारी है। और कीर्ति की माता भी एक बड़ी प्रोफ़ेसर है। कीर्ति के माता पिता अपने काम मे काफी व्यस्त रहते है। कीर्ति के पिता जब तक घर आते है तब तक कीर्ति सो चुकी होती है। कीर्ति कई बार तोह अपने पिता का चेहरा भी नहीं देख पाती। कीर्ति की माँ अपने कॉलेज के कार्य मे व्यस्त रहती थी। कीर्ति अपने घर में अपने माता पिता के साथ रहने के बावजूद बहुत अकेलापन महसुस करती थी। वह इन सब बातो से उदास रहती थी जहाँ उसके सभी मित्र अपने अपने माता पिता के साथ बाहर घूमने फिरने जाते थे,कीर्ति वही अपने घर में ही रहती थी। कीर्ति भी अपने मित्रो की तरह अपने माता पिता के साथ  फिरना चाहती थी और खुश रहना चाहती थी।

एक दिन कीर्ति घर प पिता को देख कर आश्चर्यचकित हो गयी की पिता जी आज इतनी जल्दी घर कैसे आ गए।

कीर्ति कहती है , पापा आज आप इतनी जल्दी घर कैसे आ गए ? आज में आपको घर पे देख कर बहुत खुश हूँ।

कीर्ति का पिता कहता है की , बीटा आज मेरी एक मीटिंग थी जो की आज नहीं हुए इसलिए मई आज घर जल्दी आ गया , क्यों की मुझे थोड़ी देर में कही बाहर जाना है।

कीर्ति अपने पिता की ये बात सुनकर उदास हो जाती है। और अपने पिता से एक सवाल पूछती है की पिताजी आप कितना काम लेते होंगे ?उसका पिता कहता है की ये कैसे सवाल है। अभी तुम नहीं समाज पाओगी क्योंकि तुम अभी बहुत छोटी हो।

कीर्ति फिर एक सवाल पूछती है ,की पिताजी आप एक दिन का कितना कमा लेते होंगे ? उसके पिता फिर वही उत्तर देते है।

कीर्ति फिर पूछती है की पिताजी आप एक घंटे का कितना कमा लेते है ? उसका पिता कहता है की तुम बार बार ऐसे सवाल क्यों कर रही हो ?वह फिर से कहती पिताजी बताइये तोह एक बार। उसका पिता कहता ३००० रूपए। पर बीटा तुम ये सब क्यों पूछ रही हो।

कीर्ति बिना कुछ बोले अपने कमरे मई चली जाती है और अपनी गुल्लक ले आती है और अपने पिता को दे देती है और कहती है पिताजी ये मेरे जोड़े हुए सरे रूपए है आप इन्हें रख लो और अपने इस व्यस्त जिंदगी से मुझे कुछ समय दे दो।  कीर्ति के पिता को उसकी ये बात सुन कर अपनी गलती का एहसास होता है और उसे गले से लगा लेता है।

हमे लगता है की हम अपने बचो को पैसे से खरीदी हुए चीजो से ख़ुश कर सकते है लेकिन ऐसा नहीं है। बच्चे पैसे से मिली ख़ुशी से  ज्यादा अपने पेरेंट्स द्वारा दिया गए समय और उनके प्यार से होते है। जिंदगी में पैसा सब कुछ नहीं होता। पैसे से खुशिया नहीं खरीदी जा सकती।

उम्मीद करती हूँ की आप सबको ये कहानी पसंद आयी होगी। ऐसी और भी hindi motivational story के लिया आप मेरा लिंक भी सेव कर सकते हैं।  www.achhesandesh.in


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