Saturday, October 15, 2016

सच की जीत Hindi Motivational Story

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                     सच की जीत Hindi Motivational Story 

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एक गाँव में मोहन और मनोज नाम के दो मित्र रहते थे। मोहन बहुत बुद्धिमान और सच्चे व्यक्तिव वाला व्यक्ति था। वही मनोज मंदबुद्धि और बुरे व्यक्तिव वाला व्यक्ति था। मोहन बहुत धनी और मेहनती व्यक्ति था। मनोज उसके इसी व्यक्तित्व से जलने लगा था। उसने सोचा क्यों न मैं मोहन के साथ रह के कोई नया काम करू ताकि मुझे काफी मुनाफा हो सके। मनोज मोहन से नया काम साथ करने को कहता है। मोहन काम के लिए मान जाता है। मनोज मन ही मन बहुत खुश हो रहा होता है। मनोज और मोहन साथ में काम करना शुरू कर देते है। मोहन जी तोड़ मेहनत करता है।  मोहन और मनोज मिल कर बहुत धन अर्जित कर लेते है। एक दिन मनोज मोहन से कहता है की हम अगर इतना सारा धन अपने पास रखेंगे तो ख़र्च हो जाएगा, हम इस धन को कही सुरक्षित रख देते है जहाँ  ये सुरक्षित रहे और ज़रूरत पढ़ने पर हम इसे इस्तेमाल कर सके। मोहन को मनोज की ये बात समझ में आ जाती है। मोहन मनोज से पूछता है, की धन को फिर कहा  रखे? मनोज कहता है की मैं एक ऐसे स्थान को जानता हूँ। मनोज मोहन को बताता है की गाँव  में एक ऐसा वृक्ष है जो अंदर से खोकला है हम इस धन को वह सुरक्षित रख सकते हैं। मोहन तैयार हो जाता है। दोनों अपना अपना धन लेकर उस वृक्ष के पास पहुँच जाते है,और उस वृक्ष के अंदर रख देते हैं। उसके बाद दोनों घर वापस आ जाते हैं। मनोज अगली रात को हे धन उस वृक्ष के नीचे से निकल लाता है। कुछ समय पश्चात मनोज और मोहन पुनः अपना धन लेने वापस जाते हैं। किन्तु धन वहाँ पर नहीं होता है। मनोज मोहन पर आरोप लगाने लगता है की तुमने लालच में आकर धन निकाल लिया। मनोज चिल्ला चिल्ला कर पूरा गावँ सर पर उठा लेता है और मोहन से कहता है की तुम्हारे अलावा ये बात और कोई नहीं जानता था। तो इसलिए पैसे तुमने ही चुराए होंगे। मोहन कहता है अब इस बात का  पंचायत को करने दो वही निश्चय करेगी की पैसे किसने चुराए है। दोनों पंचायत के पास जाते है और उन्हें सारी बात बताते है। पंचायत कहती है बिना गवाह  सबूत के निर्णय लेना थोड़ा मुश्किल है। मनोज कहता की अब वन देवता ही बता सकते है की गुनाहगार कौन  है। मनोज घर जाकर अपने पिता के साथ मिल कर साजिश रचता है की जब हम सब उस वृक्ष के पास पहुचे आप उसमे पहले से ही छुप  कर बैठ जाना और जब मैं वन देव का आवाह्न करू और पुछु की पैसे किसने चुराए है तब आप मोहन का नाम ले देना। अगले दिन सब उस वृक्ष के पास जाते है , मनोज वन देव को गुहार लगाता है और कहता  है ,की हे  वन देव अब आप ही  सच और झूठ का निर्णय करे की पैसे किसने चुराए है। वन देव कहते है की सारे  पैसे मोहन ने चुराए है। मोहन धैर्य रखता  है और सोचता है की ऐसा कैसे हो सकता है। वह एक कुल्हाड़ी से उस वृक्ष को काटने का प्रयास करता है और उस वृक्ष को आधा काट देता है। अब दूध  का दूध और पानी का पानी हो जाता है। पकड़े जाने पर मनोज का पिता सारा सच सबको बता देता है की पैसे मनोज ने चुराए है। गाँव के सब लोग मोहन की बुद्धिमानी की प्रसंशा करने लगते है और पंचायत मनोज को उसके इस दंड की सजा देती है।

मोहन ने धैर्य रखा और अपनी बुद्धिमता से खुद को सही साबित किया। हमे कभी भी झूट नहीं बोलना चाहिय।

उम्मीद करती हु की आप सबको यह स्टोरी पसंद आयी होगी। ऐसे और भी Hindi Motivational Story के लिए आप मेरा लिंक भी save  कर सकते हैं।  www .achhesandesh.in 

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2 comments:

  1. Very nice post. Really juth se kabhi kisi ka bhala nhi hota. Lekin juth tbi bole jisse kisi ka bhala ho. Bevjah juth apko glt kaam krva skti hai.

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  2. बहुत ही अच्छा आर्टिकल है। Very nice .... Thanks for this!! :) :)

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