Sunday, August 21, 2016

Neerja Bhanot Biography in Hindi Inspirational story

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दोस्तों आज हम आपके साथ नीरजा भनोट के जीवन के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे, की कैसे नीरजा ने अपनी जान पर खेलते हुए कई लोगो की जान बचाई, और अपनी वीरता का परिचय दिया।

Neerja Bhanot Biography in Hindi

नीरजा का जन्म 7 सितंबर 1963 को चंडीगढ़ में हुआ था। उनके पिता का  नाम हरीश भनोट और माता का नाम रमा भनोट हैं। उनके पिता मुम्बई में पत्रकारिता के पद पर कार्यरत थे। नीरजा की प्रारंभिक शिक्षा चंडीगढ़ में ही हुई। इसके पश्चात उनकी शिक्षा मुम्बई के स्कोटिश स्कूल और सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज में हुई।

नीरजा का विवाह वर्ष 1985 में हुआ था। विवाह के कुछ समय पश्चात् दहेज़ के दवाब के कारण नीरजा वापस अपने मायके आ गयी। इसके बाद नीरजा ने पैन एम में विमान परिचालिका की नौकरी के लिया आवेदन किया , और चुने जाने के बाद मियामी में ट्रेनिंग के बाद वापस लौटी।

मुम्बई से न्यूयॉर्क के लिया रवाना पैन ऍम-73 को कराची में चार आतंकवादियो ने अपहरण कर लिया और सारे यात्रियों को बंधक बना लिया। नीरजा उस विमान में सीनियर  पर्सर के पद पे नियुक्त थी। नीरजा के द्वारा दी गयी तत्काल सुचना की वजह से पायलट विमान से निकलने में कामयाब हुए। अब विमान के यात्रियों की जिम्मेदारी नीरजा के ऊपर थी। कुछ समय के बाद आतंकवादियो ने लोगो को मारना शुरू कर दिया और विमान में विस्फोटक लगाने शुरू कर दिये तो नीरजा विमान का इमरजेंसी दरवाजा खोलने में कामयाब हुई।

नीरजा चाहती तो खुद को पहले निकाल सकती थी, किन्तु उन्होंने ऐसा नहीं किया। पहले नीरजा ने यात्रियों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया। तीन बच्चो को निकालने के प्रयास में जब आतंकियों ने बच्चो पर गोली चलायी तो नीरजा बीच में आ गयी और बच्चो को सुरक्षित बाहर निकाल दिया। गोली लगने की वजह से नीरजा की मौत हो गयी। नीरजा के इसी बलिदान की वजह से उन्हें अंतराष्ट्रीय स्तर पर  हीरोइन ऑफ़ हाइजैक के रूप में प्रशिद्ध हुई।

नीरजा को भारत सरकार ने इस विरता और साहस के लिया मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया। अशोक चक्र भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। जब नीरजा की मृतु हुई उस वक़्त उनकी उम्र २३ वर्ष थी। यह पदक पाने वाली प्रथम महिला और सबसे कम उम्र की नागरिक बनी। पाकिस्तान सरकार की तरफ से उन्हें तमगा-ए-इंसानियत से नवाजा गया। वर्ष 2004 में नीरजा के सम्मान में भारत सरकार ने डाक टिकट भी जारी किया। 2004 में अमेरिका ने नीरजा को जस्टिस फॉर क्राइम अवार्ड से नवाजा।

मुझे उम्मीद है की हमे  नीरजा भनोट की जीवनी (Neerja bhanot Biography in Hindi ) पढ़ने के बाद ये सीख तो अवश्य मिली होगी की जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए। हमे अपनी ज़िन्दगी की हर कठिनाई का सामना सदैव वीरता और साहस के साथ करना चाहिए।

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